सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आदि जगद्गुरु शंकराचार्य ने अनिवार्य किया है. जिस पीठ के लिए जो योग्य पात्र होगा, उसका मंत्र, उसका भाष्य, आज की भाषा में आप कह सकते हैं थीसिस, विद्वत परिषद द्वारा अनुमोदित होता है. उसके बाद अभिषेक और फिर उस परंपरा द्वारा उसे मान्यता दी जाती है. हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं...
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