वफ़ा की राहों में चोट खाकर, मैं खुद ही गिरकर सभंल रहा हूँ
बदल चुका है बहुत ज़माना, मैं खुद को भी अब बदल रहा हूँ
तुम्हें मुबारक तुम्हारी खुशियाँ, मुझे ग़मों की कबूल हसरत
फ़ितूर तुमको चराग़ हो तुम, गुरूर मुझको मैं जल रहा हूँ
न तुमसे कोई मुझे गिला है, नसीब था जो जिसे मिला है...
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